जिम्मेदारी ( लघुकथा ).
प्रमोद लंच के बाद दुबारा अपनी कुर्सी पर बैठा ही था, अभी उसने फाइल खोली भी नहीं थी कि उसके मोबाइल पर बड़े साले प्रशांत का फोन आया। फोन पर प्रशांत ने बतलाया कि वह अपने घर में ए.सी. लगवा रहा है और घर का पुराना कूलर अगर प्रमोद चाहे तो प्रशांत उसके घर आज ही भिजवा देगा। प्रमोद ने कहा, “अगर आपके घर में जरूरत नहीं है तो भिजवा दीजिए, सुमन घर में ही है वह ठेले वाले को पैसा देकर उतरवा लेगी।” “आप सुमन को फोन कर दो, भाड़ा मैं दे दे रहा हूं वह बस सामान रखवा ले। सब कुछ बिल्कुल फिट है पानी भर कर चालू कर सकती है।” इतना कहकर उन्होंने फोन काट दिया। प्रमोद सोचने लगा 'चलो अच्छा ही हुआ कितनी गर्मी पड़ रही है पंखे की हवा तुरंत ही गर्म हो जाती है। रात के तीसरे पहर तक कमरे की दीवार तपती रहती है, रात को सोना कितना मुश्किल हो गया है। आज से चैन की नींद सो तो सकूंगा।' तभी उसे याद आया दूसरे कमरे में, जिसमें मां और पिताजी सोते हैं उसका टेबल फैन काफी पुराना होने के कारण हवा ठीक से नहीं देता है। रात को उसने देखा मां हाथ के पंखा झल रही थी। मां की तबीयत भी ठीक नहीं रह रही थी। पिता तो पहले स...