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जीवन का संघर्ष

हाँ, सच है कि आज  पूरे मन से लड़ा नहीं हूँ मैं  लेकिन हालात से अब भी  डरा नहीं हूँ मैं । सांसें थोड़ी मंद है  धड़कने हैं बंद  लेकिन बस परेशान हूँ  हारा नहीं हूँ मैं । कल फिर खड़ा मिलूंगा तुझे  जीवन के संग्राम में  माना बड़ा है तू मगर  बौना नहीं हूँ मैं । तेरे दिए जख्म अभी  भरे नहीं हैं मगर  घाव सुखाने के लिए  रूका नहीं हूँ मैं । नैया में मेरे छेद है  पतवार है टूटा हुआ  हौसले में वह दम है कि  डूबा नहीं हूँ मैं । जिस्म में मेरे सूर्य की  शक्ति का संचार है  अंधकार है चारों ओर मगर  घबराया नहीं हूँ मैं । जय की कैसी घोष है  पराजित नहीं हूँ मैं  शस्त्र नहीं हैं हाथ में मगर  भागा नहीं हूँ मैं । जिन्दगी! तेरे दांव से  अंजाना नहीं हूँ मैं  क्यों भेजी नहीं है मुश्किलें अभी मरा नहीं हूँ मैं । - अमित कुमार मिश्रा ।