जीवन का संघर्ष
हाँ, सच है कि आज
पूरे मन से लड़ा नहीं हूँ मैं
लेकिन हालात से अब भी
डरा नहीं हूँ मैं ।
सांसें थोड़ी मंद है
धड़कने हैं बंद
लेकिन बस परेशान हूँ
हारा नहीं हूँ मैं ।
कल फिर खड़ा मिलूंगा तुझे
जीवन के संग्राम में
माना बड़ा है तू मगर
बौना नहीं हूँ मैं ।
तेरे दिए जख्म अभी
भरे नहीं हैं मगर
घाव सुखाने के लिए
रूका नहीं हूँ मैं ।
नैया में मेरे छेद है
पतवार है टूटा हुआ
हौसले में वह दम है कि
डूबा नहीं हूँ मैं ।
जिस्म में मेरे सूर्य की
शक्ति का संचार है
अंधकार है चारों ओर मगर
घबराया नहीं हूँ मैं ।
जय की कैसी घोष है
पराजित नहीं हूँ मैं
शस्त्र नहीं हैं हाथ में मगर
भागा नहीं हूँ मैं ।
जिन्दगी! तेरे दांव से
अंजाना नहीं हूँ मैं
क्यों भेजी नहीं है मुश्किलें
अभी मरा नहीं हूँ मैं ।
- अमित कुमार मिश्रा ।
वास्तविकता के धरातल की यथार्थ बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति
जवाब देंहटाएंआभार आपका 🙏
हटाएंबहुत खूब, जिजीविषा और संघर्ष जीत एवं उत्कर्ष के मूल हैं ।
हटाएं🙏🙏🙏
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