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पाँच ग़ज़लें

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 1 हर दफे एक नया सवाल लेकर आती है ज़िंदगी इतनी उलझने कहाँ से लाती है। मैं तो टूट कर बिखर जाता कब का नए सबेरे की आस मुझे जिलाए जाती है। है रात तो तैय है कि उजाला भी होगा  सूरज की उदासी मुझे डराए जाती है। तुम्हारे तीर से बचने की हुनर मालूम है मुझे बच कर करूँगा क्या यह सोच मुझे खाए जाती है। वह मेरा दोस्त है जो मेरे हारने की दुआ माँगता है दोस्तों की मासूमियत मुझे उलझाए जाती है। सूरज पर भरोसा रत्तीभर भी कम नहीं हुआ है ग्रहों की कुटिल मुस्कान मुझे सताए जाती है। 2 तुम्हारी ओर टकटकी लगाए रहती है दुनिया मुझे देखता ही कौन है यहाँ तुम्हारे सिवा।। तुम्हारे छूने भर से कहीं गंगा कहीं आब-ए-ज़मज़म बह निकला मेरे हिस्से में रखा ही क्या है इन आंसुओं के सिवा।। किसी ने दौलत चाही किसी ने चाहा तख़्त-ओ-ताज मैंने चाहा ही क्या है दीदार-ए-सनम के सिवा।। मैंने रास्ते पर निगाह जमाए रखी वह देखते रहे मंजिल की ओर  मैंने निगाहों में कुछ बसाया ही कहाँ यार की सूरत के सिवा।। दुनिया में कहां पैदा होते हैं सभी एक सा मुकद्दर लेकर 'अमित' किसी को वस्ल-ए-सनम मिला किसी को मिला ही क्या दर्द-ओ-ग़म के सिवा।। 3 वह इंसा...

बिहार की पत्रकारिता के आदि स्तंभ : बिहार बंधु प्रेस और खड्ग विलास प्रेस

बिहार की भूमि ने संस्कृति, राजनीति, शिक्षा, साहित्य सभी क्षेत्रों में प्रतिनिधि की भूमिका निभायी है। पत्रकारिता का क्षेत्र भी अपवाद नहीं है। हिन्दी पत्रकारिता के आदि से लेकर वर्तमान समय तक बिहार की अनेक पत्रिकाओं ने, हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास में अक्षुण्ण उपस्थिति दर्ज कर रखी है। यह सही है कि बिहार में पत्रकारिता की शुरुआत हिन्दी पत्रकारिता के आरम्भ होने के लगभग आधी सदी के बाद हुई। (हिन्दी का प्रथम पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' 1826, एवं बिहार का प्रथम पत्र 'बिहार बंधु' 1872 में प्रकाशित हुआ।) लेकिन एक बार आरम्भ होने के बाद बिहार की हिन्दी पत्रकारिता सदैव शीर्षस्थ की अधिकारिणी बनी रही।  इस आलेख में बिहार बंधु प्रेस और खड्ग विलास प्रेस की चर्चा की गई है। वैसे तो इन दोनों प्रेसों ने पत्रिका के अलावे अन्य कई उपयोगी पुस्तकों का प्रकाशन भी किया किंतु संदर्भवश इस आलेख में पत्रिकाओं की चर्चा ही अपेक्षित है। अपना स्वर्णिम इतिहास कायम करने वाली बिहार की पत्रकारिता का आगाज 'बिहार- बंधु' के प्रकाशन से हुआ। यह तथ्य प्रमाणित हो चुका है कि कोलकाता से एक वर्ष प्रकाशन के बाद बिहार बं...