संदेश

जून, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ग़ज़ल

 सितम ये मैं किस पर किए जा रहा हूँ यह किसके सजदे में झुका जा रहा हूँ जिसने नवाजा मुझे हर खुशी से  उसे गम के आंसू दिए जा रहा हूँ बसेरा था जिस शाख पर पंक्षियों का  उसे ही मैं तोड़े लिए जा रहा हूँ मिली थी जो रिश्तों की पूंजी करम से  उससे दामन छुड़ाकर कहाँ जा रहा हूँ  एक रोटी किसी को खिला न सका  खुद को खुदाया समझे जा रहा हूँ  इंसा तक तो खुद को बना ना सका हूँ देवताओं की होड़ में भागे जा रहा हूँ किसी की नजरों में अब तक बस न सका  मन की मंदिर में खुद को ढूंढता फिर रहा हूँ । । @ अमित कुमार मिश्र.

रामवृक्ष बेनीपुरी की पत्रकारिता का स्वरूप 

बिहार से पत्र-पत्रिकाओं के संपादन कला में निष्णात साहित्यकारों की सूची में 'रामवृक्ष बेनीपुरी' का नाम अग्रगण्य है। उन्होंने दर्जनों पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया और हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता को एक नई ऊंचाई दिलाई। उनके द्वारा संपादित पत्र-पत्रिकाओं में तद्युगीन राजनैतिक चेतना भी मौजूद है और साहित्यिक क्षेत्र के तो वे श्लाघा पुरुष ही माने जाते हैं। उनके द्वारा संपादित 'तरुण भारत', 'किसान मित्र', 'युवक', 'कैदी', 'तूफान', 'बालक', 'चुन्नू मुन्नू', 'हिमालय', 'नई धारा', 'गोलमाल' जैसी पत्रिकाओं ने हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में अपनी सार्थक पहचान कायम की है। 'नई धारा' जैसी पत्रिकाओं के माध्यम से उन्होंने हिंदी साहित्य की सेवा की तो युवक, कैदी, तूफान जैसे पत्र-पत्रिकाओं से भारतीय स्वाधीनता की लड़ाई में योगदान भी दिया। जेल भी गए और 'किसान मित्र' जैसे पत्र के मार्फत कृषकों के हित की वकालत भी की। रामवृक्ष बेनीपुरी हिंदी साहित्य के साथ-साथ हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में भी विशिष्ट स्थान रखते ह...