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हालावाद (लेख)

हालावाद - सीमा कुमारी । हिंदी कविता में हालावाद का प्रवाह उस समय जोरो पर था जब समानांतर रूप से एक ओर छायावाद तो दूसरी ओर राष्ट्रीय भावधारा की कविताएं लिखी जा रही थी। हालावाद के उपजने में उस समय के राजनीतिक, सामाजिक पृष्ठभूमि की अहम भूमिका रही है। राजनैतिक रूप से भारतीय राजनीति करवट बदल रही थी। स्वाधीनता आंदोलन जो पिछले कई वर्षों से निरंतर चला आ रहा था उसका असर स्पष्ट दिखने लगा था। एक नयी राजनीतिक पारी की शुरुआत होने वाली थी। इस समय आंदोलन अपने चरमोत्कर्ष पर था और हर तरफ एक नयी बेचैनी का माहौल बना हुआ था। समाज नए-नए रूप में निर्मित और विखंडित हो रहा था। भारतीय संस्कृति का संरक्षण, पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव सब इन्हीं दिनों पैर पसार रहे थे। हर तरफ एक बेचैनी का माहौल था जिसमें घिरकर मनुष्य स्वयं को त्रस्त पा रहा था। संघर्षों के बीच ही उसका जीवन कट रहा था। ऐसे में मनुष्य के लिए जो वस्तु अप्राप्य था वह है जीवन का आनंद, जीवन का प्रेम।  हिंदी साहित्य में आरंभ से ही देखा जाए तो साहित्यकारों को दो पक्षों को लेकर चलते हुए देखा गया है। एक पक्ष तो उन साधु-संत प्रवृत्ति वाले साहित्यकारों का ह...

डॉ. रामशोभित प्रसाद सिंह का साहित्यिक अवदान (आलेख)

साहित्य सतत विकास पथ पर चलते रहने वाली एक प्रक्रिया है। किसी भी जीवित भाषा का साहित्य निरंतर गतिमान होता है। साहित्य के विकास में अनेक साहित्यकारों का श्रम रेखांकन योग्य पाया जाता है, बहुधा अनेक रचनाकारों ने तो अपना संपूर्ण जीवन ही साहित्य की श्रीवृद्धि में अर्पण कर दिया। डॉ. रामशोभित प्रसाद सिंह एक ऐसे ही व्यक्तित्व रहे हैं जिनका संपूर्ण जीवन, साहित्य सेवा को समर्पित रहा। हिंदी जगत में उन्हें साहित्य के सच्चे सेवक और एक महान पुस्तकालय विज्ञानवेत्ता के रूप में स्मरण किया जाता है। ध्यातव्य है कि साहित्य सेवा का दायित्व कई रूपों में निर्वाहित किया जाता है, गद्य-पद्य विधाओं में लेखन के अलावे भी साहित्य साधना के विभिन्न आयाम हैं। यथा, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का हिंदी साहित्य के स्वरूप निर्धारण में योगदान, कामता प्रसाद गुरु का हिंदी भाषा को व्याकरण सम्मत रूप प्रदान करना इत्यादि। डॉ. रामशोभित प्रसाद सिंह के साहित्यिक सेवा का स्वरूप सर्वाधिक मुखरित हुआ है साहित्यिक विधाओं यथा, उपन्यास, कहानी, नाटक, काव्य आदि के समालोचना संदर्भ के प्रणयन में।  राम शोभित प्रसाद सिंह प्रणीत ग्रंथों में...