जिन लाहौर नईं वेख्या ओ जम्याइ नईं ( समीक्षात्मक आलेख).
जिन लाहौर नईं वेख्या ओ जम्याइ नईं ( समीक्षात्मक आलेख). - अमित कुमार मिश्रा. हिंदी साहित्य में भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी पर अनेक रचनाकारों ने लिखा है। कहानी-उपन्यास के क्षेत्र में तो विभाजन की त्रासदी पर रचनाकारों ने जमकर लिखा है और उनकी लेखनी से जिस मानवीय संवेदना का जन्म हुआ है वह मानव को दुबारा वैसी आग में झुलसने से बचाने का सार्थक प्रयास भी करता रहा है। नाटक के क्षेत्र में ‘असगर वजाहत’ ने कई प्रभावशाली कार्य किए हैं। उनकी कहानी, उपन्यास, नाटक सभी दंगे की घटना की क्रूरता के तह में जाकर कुछ मानवीय प्रसंगों को टटोल लाते हैं जो मानवता को एक नई रौशनी देने का प्रयास करता है। इसी दिशा में उन्होंने एक प्रमुख नाट्य कृति ‘जिन लाहौर नईं वेख्या ओ जम्याइ नईं’ - 1991 ई. की रचना है। इस नाट्य कृति में भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद की दशा को तो दिखलाया ही गया है लेकिन इस नाट्य कृति का मूल प्रतिपाद्य उस त्रासदी को दिखाना या उसमें झुलसते लोगों के चित्र को सामने लाना नहीं है इसके बजाय नाटककार इस दौड़ में भी ऐसी...