सच की बारी अगले साल, (लघुकथा.)
सच की बारी अगले साल. अमित कुमार मिश्रा ‘मीत’ जैसे जैसे हमारे महाविद्यालय का वार्षिक महोत्सव निकट आ रहा था वैसे वैसे तैयारियां और जोर पकड़ रही थी। इस बार के समारोह में स्वयं मुख्यमंत्री को आमंत्रित किया गया था उनके साथ कुछ अन्य विशिष्ट मंत्रीगण भी थे जिनका आना लगभग सुनिश्चित था। पूरे महाविद्यालय में उत्साह का माहौल बना हुआ था, छात्र-छात्राओं से लेकर प्राचार्य और प्रधानाचार्य तक इस आयोजन की तैयारी में लगे हुए थे और वे किसी तरह का कसर बाकी नहीं रखना चाहते थे। सभी को एक हीं धुन सवार थी आयोजन ऐसा हो जिससे कि महाविद्यालय की छवि निखर उठे और पढ़ाई-लिखाई के माहौल में जो त्रुटि रहा गई थी उस पर पर्दा पर जाए। राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता में बढ़ोतरी हो तथा केंद्र की ओर से और तरक्की का अवसर प्राप्त हो सके। इसके लिए आवश्यक था कि आगंतुक, जिसमें कि ईश्वर की कृपा से स्वयं मुख्यमंत्री और मंत्रीगण शामिल थे, विश्वविद्यालय से प्रभावित होकर जाएं। छात्र-छात्राओं के एक समूह को आयोजन में प्रस्तुति के लिए तैयार किया जा रहा था। समूह में अलग-अलग विभाग के कई छात्र छात्राएं शा...