नफरत करता है या मुझको प्यार देता है ? (गज़ल)
वह मेरा खत चूमकर फाड़ देता है
कैसे समझूं,
नफरत करता है या मुझको प्यार देता है ?
मैंने जब भी कोशिश की इजहार-ए-मोहब्बत करने की
मुझे कल के लिए हर बार वह टाल देता है।
इस दफे मैं उससे मिलूंगा अमावस के अंधेरे में
जब भी बढ़ा हूं उसे चूमने, चांद बीच में आकर टोक देता है।
कई बार गए हैं हाथ उसके दरवाजे की कुंडी तक
कहीं इंकार न कर दे, हर बार यह डर रोक देता है।
कैसे समझूं,
नफरत करता है या मुझको प्यार देता है ?
मैंने जब भी कोशिश की इजहार-ए-मोहब्बत करने की
मुझे कल के लिए हर बार वह टाल देता है।
इस दफे मैं उससे मिलूंगा अमावस के अंधेरे में
जब भी बढ़ा हूं उसे चूमने, चांद बीच में आकर टोक देता है।
कई बार गए हैं हाथ उसके दरवाजे की कुंडी तक
कहीं इंकार न कर दे, हर बार यह डर रोक देता है।
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