इस मौसम की सर्दी. (प्रेम गीत)
रात मिलन की बेला है,
तुझे सुबह की कैसी जल्दी ?
तेरा तौर समझ न आए
प्रीत से मुख क्यों मोड़ के चल दी ?
रात गए तो आए थे तुम
सुबह-सुबह जाने की कह दी ।
कैसी भूल हुई थी मुझसे,
चूक बिना बतलाए चल दी ।
यौवन पूरी रात है बरसी
मन में प्यास जगा कर चल दी ।
तुझको ऐसी क्या है जल्दी
जीवन घट को भी, न कह दी।
रूप मेरा मदिरा का प्याला
पीए बिना क्यों तुमने चल दी ?
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