प्रेम ही ईश्वर है ( कविता )

मुहब्बत के तौर-तरीकों से वाकिफ कहां हैं लोग
प्यार में खुदा को तलाशते कहां है लोग।

इन्हें तो पत्थर की मूर्तियों से प्रेम है
प्रेम ही ईश्वर है, स्वीकारते कहां हैं लोग।

पाने को मुहब्बत लालायित तो हैं सभी
शीश देने को अब भी राजी कहां हैं लोग।

तंग गली है दोनों का गुजारा नहीं यहां
अपना घर फूंके ऐसे बेपरवाह कहा हैं लोग।

© अमित कुमार मिश्रा।


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