प्रेम पुजारी ( कविता )

हर शै के तह में जाकर देखो
           कोई और फसाना होता है।
हर यार वफा की मूरत है
           बस वक्त बेवफा होता है।
कैसे तेरा दिल तोड़ेगा
           दिल जिसका बसेरा होता है।
क़ायम न रहा जो वादे-वफा पर
           वह कोई लूटेरा होता है।
मंदिर के देवता को छोड़ो
           पत्थर बस पत्थर होता है।
तू लाख पटक ले सिर चाहे
           कोई सुनवाई न होता है।
सच्चा इक मीत बनाकर देख
           कुछ कहे बिना सब सुनता है।
'अमित' ऐसे दिवानों का कायल
           जो प्रेम पुजारी होता है।

@ अमित कुमार मिश्रा।

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